गरियाबंद जिले के छुरा विकासखंड के अंतिम छोर पर स्थित सोरिद खुर्द, नागझर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों वन्यजीवों की गतिविधियां बढ़ गई हैं। फिंगेश्वर वन परिक्षेत्र के कक्ष क्रमांक-21 (सिरसाहिनार) के जंगल में छह गौर (भारतीय बाइसन) का दल एक साथ देखे जाने के बाद वन विभाग ने ग्रामीणों के लिए एडवाइजरी जारी कर सतर्क रहने की अपील की है। गौरों की मौजूदगी की पुष्टि के बाद वन अमला पूरे क्षेत्र में लगातार निगरानी कर रहा है।
वन विभाग के अनुसार वर्षा ऋतु में भोजन और पानी की तलाश में वन्यजीव अक्सर जंगल से लगे इलाकों तक पहुंच जाते हैं। इसी को देखते हुए किसानों, मवेशी चराने वाले ग्रामीणों और जंगल आधारित गतिविधियों से जुड़े लोगों को अनावश्यक रूप से वन क्षेत्र में प्रवेश नहीं करने तथा खेत-खार में विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा जंगली पशु
गौर (भारतीय बाइसन) भारतीय उपमहाद्वीप का सबसे बड़ा जंगली पशु माना जाता है। विशाल शरीर और तेज गति वाला यह वन्यजीव सामान्यतः शांत स्वभाव का होता है, लेकिन खतरा महसूस होने पर बेहद आक्रामक हो सकता है। इसी कारण वन विभाग ने ग्रामीणों से गौरों के करीब न जाने, उन्हें उकसाने, भगाने या तस्वीर लेने की कोशिश नहीं करने की अपील की है।
स्थानीय ग्रामीणों के मुताबिक पिछले कुछ दिनों से जंगल में बड़े वन्यजीवों की गतिविधियों के संकेत मिल रहे थे। अब छह गौरों का दल दिखाई देने के बाद क्षेत्र में चर्चा का माहौल है। फिलहाल किसी प्रकार की जनहानि या फसल नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन एहतियात के तौर पर निगरानी बढ़ा दी गई है।
वन विभाग ने कहा है कि यदि किसी भी व्यक्ति को गौर दिखाई दें तो इसकी सूचना तुरंत निकटस्थ वनरक्षक, बीट गार्ड या वन विभाग के अधिकारियों को दें। अधिकारियों का कहना है कि समय पर सूचना और सतर्कता से मानव-वन्यजीव संघर्ष की किसी भी संभावना को रोका जा सकता है।

