Jatmai-Ghatarani: मानसून की पहली जोरदार बारिश ने गरियाबंद जिले के प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों जतमई-घटारानी, झरझरा और चिंगरा पगार जलप्रपात को फिर से गुलजार बना दिया है। बीते दो दिनों से लगातार हो रही बारिश के बाद इन जलप्रपातों में पानी का तेज बहाव शुरू हो गया है। पहाड़ों से उतरती दूधिया जलधारा, चारों ओर फैली हरियाली और ठंडी हवाओं के बीच प्राकृतिक सौंदर्य अपने पूरे शबाब पर नजर आ रहा है। यही वजह है कि सप्ताहांत और अवकाश के दिनों में बड़ी संख्या में पर्यटक इन जलप्रपातों का दीदार करने पहुंच रहे हैं।

बारिश की पहली फुहार के साथ ही जतमई-घटारानी का पूरा इलाका मानो प्रकृति की हरी चादर में लिपट गया है। ऊंची पहाड़ियों से गिरती जलधाराएं और जंगलों के बीच गूंजती पानी की कल-कल की आवाज पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर रही है। लंबे इंतजार के बाद जलप्रपातों में लौटे इस मनोहारी दृश्य ने मानसून पर्यटन की शुरुआत का संकेत दे दिया है।
प्राकृतिक सौंदर्य ने मोहा मन

Jatmai-Ghatarani: जतमई, घटारानी और झरझरा जलप्रपात हर साल बारिश शुरू होते ही पर्यटकों के लिए सबसे पसंदीदा स्थलों में शामिल हो जाते हैं। इस बार भी पहली अच्छी बारिश के बाद झरनों का जलस्तर तेजी से बढ़ा है, जिससे इनकी खूबसूरती कई गुना बढ़ गई है। जंगलों की हरियाली, पहाड़ों से गिरता पानी और सुहावना मौसम प्रकृति प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है। मंदिर दर्शन के साथ-साथ पर्यटक झरनों के मनोरम दृश्य का भी भरपूर आनंद ले रहे हैं।
पर्यटकों की बढ़ी आवाजाही
शनिवार और रविवार को रायपुर, महासमुंद, धमतरी, बलौदाबाजार, गरियाबंद सहित आसपास के जिलों से बड़ी संख्या में लोग जतमई और घटारानी पहुंचे। परिवार और दोस्तों के साथ पहुंचे पर्यटकों ने प्राकृतिक सौंदर्य के बीच फोटोग्राफी, सेल्फी और मानसून का आनंद लिया।
नदी-नाले उफान पर, सतर्कता जरूरी
लगातार बारिश के कारण जिले के कई नदी-नाले उफान पर हैं। जलप्रपातों में भी पानी का बहाव लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में प्रशासन ने पर्यटकों से अपील की है कि वे सुरक्षा मानकों का पालन करें, तेज बहाव वाले क्षेत्रों में उतरने या सेल्फी लेने के लिए जोखिम न उठाएं तथा सुरक्षा सीमाओं के भीतर रहकर ही प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लें।
मानसून पर्यटन का प्रमुख केंद्र
Jatmai-Ghatarani: गरियाबंद जिले के जतमई, घटारानी और झरझरा जलप्रपात वर्षों से मानसून पर्यटन की पहचान बने हुए हैं। रायपुर से लगभग 85 किलोमीटर दूर स्थित ये तीनों स्थल एक-दूसरे से करीब 7 से 10 किलोमीटर की दूरी पर स्थित हैं। धार्मिक आस्था और प्राकृतिक सुंदरता का अनूठा संगम होने के कारण हर वर्ष लाखों पर्यटक यहां पहुंचते हैं।
चिंगरा पगार भी हुआ गुलजार

जिले का प्रसिद्ध चिंगरा पगार जलप्रपात भी पहली बारिश के बाद पूरी रौनक में आ गया है। लगभग 110 फीट की ऊंचाई से गिरती जलधारा और चारों ओर फैले घने जंगल पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। रायपुर से लगभग 75 किलोमीटर दूर स्थित यह जलप्रपात भी मानसून के दौरान पिकनिक और प्रकृति प्रेमियों की पहली पसंद बन जाता है।
कैसे पहुंचे जतमई-घटारानी
Jatmai-Ghatarani: रायपुर से राजिम होते हुए पाण्डुका मार्ग के जरिए सड़क मार्ग से जतमई आसानी से पहुंचा जा सकता है। राजधानी रायपुर से करीब 85 किमी जतमई की दूरी है। जतमई से घटारानी लगभग 7 किलोमीटर तथा घटारानी से झरझरा लगभग 10 किलोमीटर पर स्थित है। सभी स्थल सड़क मार्ग से जुड़े होने के कारण यहां बस, निजी वाहन और टैक्सी से आसानी से पहुंचा जा सकता है।
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