Shyam Agrawal
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महानदी बाढ़ Mahanadi Flood Nawapara (10)
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नवापारा महानदी में आई भीषण बाढ़ का पानी उतर चुका है, लेकिन नवापारा अंचल में तबाही के निशान अब भी साफ दिखाई दे रहे हैं। सोमवारी बाजार, इंदिरा मार्केट, तिरंगा चौक, बगदेही पारा समेत कई इलाकों में घरों से पानी तो निकल गया, लेकिन पीछे कीचड़, गंदगी, बदबू और बर्बादी छोड़ गया है। सैकड़ों परिवारों के घरों में रखा राशन, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, बाइक और घरेलू उपयोग की सामग्री खराब हो गई है।

गंगरेल प्रबंधन पर सवाल!

महानदी बाढ़ Mahanadi Flood Nawapara (10)इस बाढ़ के बाद अब गंगरेल बांध प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि जब गंगरेल जलाशय लगभग 100 फीसदी भर चुका था, तब करीब 3 लाख क्यूसेक पानी एक साथ महानदी में छोड़े जाने से नीचे के क्षेत्रों में जलस्तर तेजी से बढ़ा। आरोप है कि मौसम विभाग के पूर्वानुमान और लगातार हो रही बारिश को देखते हुए पानी की निकासी पहले से चरणबद्ध तरीके से कम मात्रा में की जाती, तो महानदी के निचले इलाकों पर अचानक इतना दबाव नहीं पड़ता और सैकड़ों परिवारों को भारी नुकसान से बचाया जा सकता था।

पहले क्यों नहीं छोड़ा पानी?

महानदी बाढ़ Mahanadi Flood Nawapara (10)लोगों का सवाल यही है कि जब जलाशय का जलस्तर लगातार बढ़ रहा था और भारी बारिश का पूर्वानुमान मौजूद था, तो पहले से नियंत्रित और चरणबद्ध तरीके से पानी छोड़ने की व्यवस्था क्यों नहीं की गई? अचानक बड़ी मात्रा में पानी छोड़े जाने से निचले क्षेत्रों को संभलने का पर्याप्त समय नहीं मिला। महानदी का जलस्तर बढ़ते ही नवापारा के कई मोहल्लों में पानी तेजी से घुस गया और देखते ही देखते घर जलमग्न हो गए।

लोगों ने मांग किया है कि गंगरेल से पानी छोड़ने की टाइमिंग और मात्रा की तकनीकी समीक्षा हो। लापरवाही सामने आने पर जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की जाए। साथ ही भविष्य में भारी बारिश की स्थिति में पहले से चरणबद्ध जल निकासी की स्पष्ट व्यवस्था बनाई जाए।

पानी उतर गया, लेकिन घर रहने लायक नहीं

महानदी बाढ़ Mahanadi Flood Nawapara (10)बाढ़ का पानी उतरने के बाद प्रभावित परिवारों की मुश्किलें कम होने के बजाय नई चुनौतियों के रूप में सामने आ गई हैं। घरों की दीवारों और फर्श पर कीचड़ की मोटी परत जमा है। गीले इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से करंट का खतरा बना हुआ है। नमी के कारण घरों में दुर्गंध फैलने लगी है। पीड़ित परिवारों का कहना है घर पर रखा राशन खराब, फर्नीचर खराब, वाहन खराब और जरूरी सामान बर्बाद हो गए।

संक्रमण और मच्छरजनित बीमारियों का खतरा बढ़ा

बाढ़ प्रभावित इलाकों में पानी उतरने के बाद जगह-जगह गंदा पानी और कीचड़ जमा है। इससे मच्छरों का प्रकोप बढ़ने की आशंका है। स्थानीय लोगों ने प्रभावित मोहल्लों में तत्काल दवा और कीटनाशक का छिड़काव, साफ-सफाई, ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव तथा स्वास्थ्य विभाग की टीमों की तैनाती की मांग की है।

नुकसान का सर्वे कर तत्काल मुआवजा देने की मांग

महानदी बाढ़ Mahanadi Flood Nawapara (10)बाढ़ से प्रभावित परिवारों ने प्रशासन से घर-घर सर्वे कर वास्तविक नुकसान का आकलन कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि सिर्फ पानी उतर जाना राहत नहीं है। जिन परिवारों का घर, सामान, वाहन, राशन और खेती प्रभावित हुई है, उन्हें तत्काल आर्थिक सहायता और मुआवजा मिलना चाहिए।

40 साल बाद ऐसी बाढ़ का दावा

महानदी बाढ़ Mahanadi Flood Nawapara (10)स्थानीय लोगों का कहना है कि नवापारा अंचल में करीब 40 साल बाद इस स्तर की बाढ़ आई है। खेतों में पानी भरने से फसलों को भी नुकसान हुआ है। प्रभावित लोगों का कहना है कि अगर गलती हुई है तो उसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए और नुकसान झेलने वाले परिवारों को राहत मिलनी चाहिए।

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By Yuvraj Sahu

Yuvraj Sahu Editor – Khabar Vistar युवराज साहू (Yuvraj Sahu) खबर विस्तार (Khabar Vistar) के संपादक हैं। वे छत्तीसगढ़ की स्थानीय, प्रशासनिक, अपराध, शिक्षा एवं जनहित से जुड़ी खबरों का निष्पक्ष और तथ्यपरक कवरेज करते हैं।

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