देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के केंद्र अयोध्या स्थित भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और दान राशि में गबन का मामला अब बड़ा प्रशासनिक और राजनीतिक मुद्दा बन गया है। विशेष जांच दल (एसआईटी) की प्रारंभिक जांच के बाद सामने आए तथ्यों के आधार पर अयोध्या पुलिस ने इस मामले में नामजद आठ आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस ने आरोपियों के ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी कर अब तक करीब 79.85 लाख नकद बरामद किए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा सौंप दिया है। हालांकि ट्रस्ट ने स्पष्ट किया है कि इस्तीफों पर अंतिम फैसला अगली बैठक में लिया जाएगा।
जानिए पूरा मामला
पूरा विवाद जून के पहले सप्ताह में उस समय सामने आया, जब मंदिर के दान और चढ़ावे में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगाए गए। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मुख्यमंत्री के निर्देश पर लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया। जांच के दौरान दानपात्रों से नकदी निकालने, उसकी गणना और बैंक में जमा करने की पूरी प्रक्रिया की गहन पड़ताल की गई।
इसी दौरान मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और अन्य डिजिटल साक्ष्यों ने कई चौंकाने वाले तथ्य उजागर किए। प्रारंभिक जांच में दानपात्रों से नकदी की हेराफेरी और मानक प्रक्रिया (एसओपी) के उल्लंघन के संकेत मिलने के बाद एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू की गई।
मंदिर प्रबंधन से जुड़े थे आरोपी

पुलिस ने जिन आठ लोगों को गिरफ्तार किया है, उनमें रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव, मनीष यादव, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, अविनाश शुक्ला, करुणेश पांडेय, रमाशंकर मिश्र और सुभाष श्रीवास्तव शामिल हैं। ये सभी मंदिर के दान की गणना, सुरक्षा अथवा नकदी प्रबंधन से जुड़े कार्यों में शामिल बताए जा रहे हैं।
सभी आरोपियों को अदालत में पेश किए जाने के बाद न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस अब उनसे पूछताछ कर यह पता लगाने में जुटी है कि इस कथित गबन में और कौन-कौन शामिल था तथा चोरी की राशि आखिर कहां-कहां निवेश की गई।
79.85 लाख नकद बरामद
गिरफ्तारी के बाद अयोध्या पुलिस और क्राइम ब्रांच ने सभी आरोपियों के घरों पर एक साथ छापेमारी की। जांच में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। पुलिस ने अब तक करीब 79.85 लाख नकद बरामद किए हैं। एक आरोपी के घर में गोबर के ढेर के भीतर छिपाकर रखी गई नकदी भी बरामद होने की बात सामने आई है।
जांच एजेंसियां आरोपियों की चल-अचल संपत्तियों, बैंक खातों, महंगी जमीनों, मकानों और लग्जरी वाहनों की भी जांच कर रही हैं। पुलिस का मानना है कि पिछले कुछ वर्षों में इन कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति में असामान्य वृद्धि हुई थी, जिसकी भी पड़ताल की जा रही है।
चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा

मामले के तूल पकड़ने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा ने अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। ट्रस्ट ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि दोनों के इस्तीफे प्राप्त हो गए हैं और उन पर अगली बैठक में निर्णय लिया जाएगा।
साथ ही ट्रस्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि श्रद्धालुओं द्वारा दान किए गए सोने-चांदी के आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं सुरक्षित हैं तथा जांच का दायरा मुख्य रूप से नकद दान के प्रबंधन से जुड़ा है। ट्रस्ट ने निष्पक्ष जांच का भरोसा दिलाते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का समर्थन किया है।
विपक्षी दलों ने उठाए सवाल
इस घटना के कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी दलों ने सरकार और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। कुछ नेताओं ने पूरे प्रकरण की जांच केंद्रीय एजेंसी से कराने की मांग उठाई है। वहीं दूसरी ओर भाजपा और ट्रस्ट से जुड़े पक्षों का कहना है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और जांच पूरी पारदर्शिता से आगे बढ़ रही है।
श्रद्धालुओं में आक्रोश
उधर, देशभर से अयोध्या पहुंचने वाले श्रद्धालुओं में इस घटना को लेकर गहरी नाराजगी और निराशा है। लोगों का कहना है कि भगवान राम के चरणों में श्रद्धा से अर्पित दान में यदि कोई हेराफेरी करता है तो यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था के साथ विश्वासघात है। अब सबकी निगाहें पुलिस की आगे की जांच पर टिकी हैं कि क्या पूछताछ में इस पूरे मामले से जुड़े अन्य लोगों के नाम भी सामने आते हैं या नहीं।
फिलहाल पुलिस लगातार छापेमारी, डिजिटल साक्ष्यों की जांच और वित्तीय लेन-देन की पड़ताल में जुटी हुई है, जबकि यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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