राजिम। शहर के गायत्री मंदिर सभागृह में रत्नांचल जिला साहित्य एवं जनकल्याण समिति, गरियाबंद के तत्वावधान में रत्नांचल पुस्तक परिचर्चा एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ अतिथियों द्वारा मां सरस्वती के छायाचित्र पर दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। इसके बाद अतिथियों का पुष्पहार से स्वागत एवं अभिनंदन किया गया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि छत्तीसगढ़ राज्य गृह भंडार निगम के अध्यक्ष एवं कैबिनेट मंत्री दर्जा प्राप्त चंदूलाल साहू ने कहा कि राजिम साहित्यकारों की भूमि है और साहित्य समाज का दर्पण होता है। साहित्यकार अपनी सोच, विचार और संवेदनाओं को शब्दों में अभिव्यक्त कर समाज को सकारात्मक दिशा देने का कार्य करते हैं।
उन्होंने वर्तमान समय में साहित्य के प्रति घटते रुझान पर चिंता जताते हुए कहा कि आज मोबाइल की छोटी-सी स्क्रीन पर लगभग हर जानकारी उपलब्ध है। ऐसे दौर में गरियाबंद जिले के सैकड़ों साहित्यकारों की रचनाओं से सुसज्जित ‘रत्नांचल’ पुस्तक का प्रकाशन बेहद हर्ष का विषय है। यह पुस्तक जिले की साहित्यिक यात्रा और विरासत को संजोने वाला स्थायी दस्तावेज है, जो आने वाली पीढ़ियों के लिए महत्वपूर्ण धरोहर साबित होगा।
राजिम की धरती साहित्य के लिए सदैव उर्वरा रही – महेश यादव
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे नगर पालिका राजिम के अध्यक्ष महेश यादव ने कहा कि साहित्य के क्षेत्र में राजिम की भूमि हमेशा से अत्यंत उर्वरा रही है। पंडित सुंदरलाल शर्मा, पुरुषोत्तम अनासक्त, संत कवि पवन दीवान और कृष्ण रंजन जैसे साहित्यकारों की रचनाएं आज भी प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में भी राजिम में तीन-चार साहित्यिक समितियां सक्रिय हैं, जहां कवियों की रचनाओं का पाठ और साहित्यिक चर्चा निरंतर होती रहती है। यह राजिम के लिए गौरव की बात है।
रत्नांचल ने साहित्यकारों को दिया साझा मंच
विशिष्ट अतिथि एवं गजलकार ओमप्रकाश गोयल ‘अश्क-बस्तरी’ ने कहा कि ‘रत्नांचल’ पुस्तक के माध्यम से जिले के साहित्यकारों को एक साझा मंच मिला है। इसमें प्रकाशित रचनाएं साहित्य के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होंगी। उन्होंने इस अवसर पर अपनी गजल भी प्रस्तुत की, जिसे उपस्थित श्रोताओं ने सराहा।
समिति के अध्यक्ष जितेंद्र सुकुमार ‘साहिर’ ने स्वागत भाषण देते हुए समिति की गतिविधियों और उद्देश्यों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि ‘रत्नांचल’ काव्य संग्रह में गरियाबंद जिले के 150 रचनाकारों की रचनाएं शामिल हैं, जिनमें 25 दिवंगत रचनाकार और 125 वर्तमान में सक्रिय रचनाकार हैं।
रचना के लिए साधना और मेहनत जरूरी-काशीपुरी कुंदन
प्रसिद्ध हास्य-व्यंग्य कवि काशीपुरी कुंदन ने कहा कि मां सरस्वती के साधक को अच्छी रचना के लिए निरंतर साधना और मेहनत करनी पड़ती है। ‘रत्नांचल’ में कवियों के विचारों के साथ-साथ उनकी मेहनत, संवेदनाओं और रचनात्मक दृष्टि की झलक भी दिखाई देती है।
Gen-G साहित्य सृजन से दे रही सकारात्मक संदेश
वरिष्ठ साहित्यकार एवं भाषाविद् दिनेश चौहान ने ‘जेन-जी’ पीढ़ी का उल्लेख करते हुए कहा कि जहां देश में जेन-जी के विरोध-प्रदर्शन की तस्वीरें सामने आईं, वहीं गरियाबंद की जेन-जी पीढ़ी साहित्य सृजन के माध्यम से सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ रही है। उन्होंने काव्य संग्रह में शामिल जेन-जी और अल्फा पीढ़ी से संबंधित रचनाओं का उल्लेख करते हुए एकांत सोनसार्वा की कविताओं का पाठ किया। कविता पाठ पर श्रोताओं ने तालियों से उनका उत्साहवर्धन किया।
साहित्यकार बूढ़ा होता है, उसकी रचनाएं जवान होती हैं
वरिष्ठ साहित्यकार व्यास नारायण चतुर्वेदी ने कहा कि साहित्यकार जब बूढ़ा होता है, तब उसकी रचनाएं जवान होती हैं। ‘रत्नांचल’ में दिवंगत रचनाकारों को भी स्थान दिया गया है और वर्तमान में निरंतर लेखन कर रहे साहित्यकारों को भी मंच प्रदान किया गया है। उन्होंने पुस्तक के आगामी संस्करणों में आलेखों को भी स्थान देने का सुझाव दिया।
साहित्यकारों को मिला ‘रत्नांचल का रत्न सम्मान’
कार्यक्रम के दौरान धमतरी के मनीराम साहू एवं धर्मेंद्र सिंहा, बंधु राजेश्वर खरें, संतोष शर्मा, सुरेश बंजारे, प्रदीप मिश्रा, युवराज देवदास और सुखीराम साहू को ‘रत्नांचल का रत्न सम्मान’ प्रदान किया गया।
इसके अलावा जितेंद्र सुकुमार ‘साहिर’, डॉ. मुन्नालाल देवदास, नूतनलाल साहू ‘नूतन’, पुरुषोत्तम चक्रधारी, प्रदीप कुंवरदादा, बीएल श्रीवास, विजय सिन्हा, रेनू शर्मा, सरोज कंसारी, भोजराम साहू, संतोष साहू, अशोक शर्मा, केंवरा यदु, सुरेश बंजारे, कल्याणी कंसारी और भवानी कंसारी सहित अन्य साहित्यकारों को प्रशस्ति पत्र एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। उपस्थित अतिथियों को भी स्मृति चिन्ह प्रदान किए गए।
कार्यक्रम का संचालन संतोष कुमार सोनकर मंडल ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन मुन्नालाल देवदास ने किया। इस अवसर पर पार्षद सुरेश पटेल, भाजपा मंडल अध्यक्ष रिकेश साहू, उपाध्यक्ष भारत सिन्हा, बादल साहू सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, जनप्रतिनिधि एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
साहित्यिक विरासत को सहेजने की पहल
‘रत्नांचल’ पुस्तक के माध्यम से गरियाबंद जिले के 150 रचनाकारों को एक मंच पर लाने की पहल न केवल जिले की साहित्यिक प्रतिभाओं को पहचान देने वाली है, बल्कि यह स्थानीय साहित्य, संस्कृति और रचनात्मक परंपरा को दस्तावेज के रूप में सुरक्षित रखने की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम है।
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