रायपुर। जिले के स्कूलों में स्कूल प्रबंधन समितियों (एसएमसी) के गठन को लेकर उठे सवालों के बीच शिक्षा विभाग का आदेश सामने आया है। राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) छत्तीसगढ़ ने 11 अक्टूबर को प्रकाशित समाचार के माध्यम से एसएमसी के गठन में देरी का मुद्दा उठाते हुए जिला शिक्षा अधिकारी की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए थे। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष एवं जनपद पंचायत अभनपुर के पूर्व सभापति टिकेंद्र सिंह ठाकुर ने शासन के निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की थी।
दो चरणों में निर्धारित की गई समय-सारिणी
अब स्कूल प्रबंधन समितियों के गठन की प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय-सारिणी निर्धारित की गई है। शिक्षा विभाग के उपलब्ध आदेश के अनुसार, स्कूल प्रबंधन समितियों के गठन की प्रक्रिया के लिए दो चरण निर्धारित किए गए हैं। पहले चरण में 1 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक तथा दूसरे चरण में 1 जनवरी से 31 मार्च 2027 तक की अवधि तय की गई है। आदेश में संबंधित अधिकारियों को निर्धारित समय-सीमा के अनुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
इस समय-सारिणी के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रायपुर जिले में एसएमसी गठन की प्रक्रिया किस गति से आगे बढ़ती है और शासन के निर्देशों के अनुरूप समितियों का गठन तथा पदाधिकारियों का चयन कब तक पूरा होता है।
पालकों की भागीदारी है एसएमसी का प्रमुख आधार
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा 12 जून 2026 को जारी दिशा-निर्देशों में स्कूल प्रबंधन समितियों की संरचना, सदस्यों के चयन और समिति की कार्यप्रणाली का उल्लेख किया गया है। इन निर्देशों के अनुसार समिति में विद्यार्थियों के माता-पिता या अभिभावकों की 75 प्रतिशत भागीदारी सुनिश्चित की जानी है। महिलाओं की 50 प्रतिशत भागीदारी तथा सामाजिक एवं आर्थिक रूप से पिछड़े वर्गों और विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के अभिभावकों को प्रतिनिधित्व देने का भी प्रावधान है।
समिति की पहली बैठक में अध्यक्ष एवं उपाध्यक्ष के निर्वाचन की व्यवस्था भी निर्देशों में शामिल है। इन समितियों का उद्देश्य स्कूलों के संचालन, विकास और शैक्षणिक गतिविधियों में पालकों की भागीदारी को मजबूत करना है।
टिकेंद्र ठाकुर ने उठाए थे सवाल
इंटक कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष टिकेंद्र सिंह ठाकुर ने आरोप लगाया था कि रायपुर जिले में एसएमसी गठन की प्रक्रिया अपेक्षित रूप से आगे नहीं बढ़ रही है। उन्होंने कहा था कि जब शासन ने स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं, तो उनका पालन सुनिश्चित करना शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी है। ठाकुर ने मामले को जिला पंचायत की सामान्य सभा में भी उठाए जाने का उल्लेख करते हुए विभागीय अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की थी।
उन्होंने चेतावनी दी थी कि यदि मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई, तो संगठन शिक्षा मंत्री का घेराव करेगा। संगठन ने जिला शिक्षा अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने और आवश्यक कार्रवाई करने की मांग भी की थी।
अब क्रियान्वयन पर रहेगी नजर
एसएमसी गठन के मुद्दे पर जारी समय-सारिणी के बाद अब विभागीय निर्देशों के वास्तविक क्रियान्वयन पर नजर रहेगी। महत्वपूर्ण यह होगा कि रायपुर जिले के स्कूलों में समितियों का गठन निर्धारित समय-सीमा के अनुरूप होता है या नहीं और पालकों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।
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