नवापारा। ग्राम पटेवा स्थित एकेडमिक हाइट्स पब्लिक स्कूल में अध्ययनरत एक छात्र के साथ मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना के मामले में पुलिस ने विद्यालय की प्राचार्य पल्लवी मरार के खिलाफ किशोर न्याय (बालकों की देखभाल एवं संरक्षण) अधिनियम, 2015 की धारा 75 के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट में सामने आए तथ्यों के आधार पर यह कार्रवाई की गई है। मामले में विद्यालयीन अनुशासन के नाम पर छात्र के साथ अनुचित व्यवहार किए जाने का आरोप है।
होमवर्क अधूरा होने पर कान मरोड़ने का आरोप
मिली जानकारी के अनुसार, छात्र के पालक ने विद्यालय प्रबंधन और शिक्षकों के व्यवहार को लेकर शिकायत की थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि 15 अक्टूबर 2025 को सुबह करीब 10 बजे स्कूल में अनुशासन के नाम पर छात्र को मानसिक संताप और शारीरिक असुविधा पहुंचाई गई। शिकायत के बाद शिक्षा विभाग ने जांच दल गठित कर मामले की पड़ताल कराई।
विकासखंड शिक्षा अधिकारी, अभनपुर के निर्देश पर गठित जांच दल ने 31 जुलाई 2026 को विद्यालय का औचक निरीक्षण किया। दल में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मानिकचौरी के प्राचार्य एसपी साव और शासकीय हाईस्कूल नवागांव के प्रभारी प्राचार्य मदन गोपाल रात्रे शामिल थे। जांच के दौरान शिकायतकर्ता पालक, छात्र, प्राचार्य और संबंधित शिक्षकों के बयान दर्ज किए गए।
जांच प्रतिवेदन के अनुसार, छात्र ने बयान में बताया कि गृहकार्य अधूरा रहने पर गणित शिक्षक अजय कुमार देवांगन ने उसका कान मरोड़ा था। वहीं, प्राचार्य पल्लवी मरार और शिक्षिका नयन साहू द्वारा छात्र के लंबे बालों की चोटी बनाए जाने की बात भी सामने आई। रिपोर्ट में बाल काटे जाने की घटना का भी उल्लेख है। हालांकि, संबंधित गणित शिक्षक ने शारीरिक दंड देने के आरोप से इनकार किया। प्राचार्य ने अनुशासन बनाए रखने के लिए बच्चों के बाल व्यवस्थित कराने की बात स्वीकार की।
चिकित्सकीय रिपोर्ट में परेशानी का उल्लेख
जांच रिपोर्ट में रायपुर के कोलर स्थित धन्वंतरी हॉस्पिटल के मनोचिकित्सक की 5 जून 2026 की रिपोर्ट का हवाला दिया गया है। इसमें छात्र को नींद में परेशानी, चिड़चिड़ापन और स्कूल जाने से डर जैसी समस्याएं होने का उल्लेख है। रिपोर्ट में इन समस्याओं को विद्यालय में बालों से जुड़ी घटना के बाद की स्थिति से संबंधित बताया गया है। छात्र को पहले से अस्थमा की समस्या होने की बात भी दर्ज है।
आरटीई अधिनियम का भी दिया गया हवाला
शिक्षा विभाग की जांच में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 17 का उल्लेख करते हुए बच्चों को शारीरिक दंड देने और मानसिक प्रताड़ना पहुंचाने पर प्रतिबंध की बात कही गई। जांच दल ने विद्यालय प्रबंधन और संबंधित शिक्षकों को भविष्य में ऐसा व्यवहार नहीं करने की चेतावनी देने तथा छात्र के शैक्षणिक दस्तावेज उपलब्ध कराने की अनुशंसा की।
थाने में शिकायत दर्ज
शिक्षा विभाग की जांच रिपोर्ट प्रस्तुत होने के बाद थाना गोबरा नवापारा में 23 अक्टूबर 2026 को पुलिस ने उसका अवलोकन कर प्राचार्य के खिलाफ अपराध दर्ज किया। फिलहाल मामले की विवेचना जारी है। जांच के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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