गरियाबंद। आस्था की नगरी जतमई धाम में शनिवार को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण की अनूठी पहल देखने को मिली। मंदिर परिसर को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए विधायक रोहित साहू, कलेक्टर रणबीर शर्मा, जिला पंचायत सीईओ प्रखर चंद्राकर सहित जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और नागरिकों ने हाथों में झाड़ू लेकर श्रमदान किया।
किसी ने कचरा एकत्र किया तो किसी ने पौधरोपण कर हरियाली बढ़ाने का संदेश दिया। ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत ‘सेवा मेरा योगदान’ कार्यक्रम के तहत आयोजित इस अभियान में जतमई धाम को स्वच्छ, हरित और प्लास्टिक मुक्त बनाने का संकल्प लिया गया।
रुद्राक्ष और वटवृक्ष रोपकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश
गरियाबंद वनमंडल द्वारा आयोजित कार्यक्रम में राजिम विधायक रोहित साहू ने रुद्राक्ष का पौधा लगाया, जबकि कलेक्टर रणबीर शर्मा ने वटवृक्ष का रोपण किया। जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी प्रखर चंद्राकर और वनमंडलाधिकारी मयंक पांडे सहित अन्य अधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों ने भी पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
पौधरोपण के बाद सभी ने मंदिर परिसर के विभिन्न हिस्सों में सफाई की और कचरा एकत्र किया। अभियान के जरिए श्रद्धालुओं और पर्यटकों को कचरे का उचित निस्तारण करने, एकल उपयोग वाले प्लास्टिक से दूरी बनाने तथा धार्मिक स्थलों की स्वच्छता बनाए रखने के लिए जागरूक किया गया।
विकसित भारत के लिए जनभागीदारी जरूरी – रोहित साहू
इस अवसर पर विधायक रोहित साहू ने कहा कि विकसित भारत के संकल्प को साकार करने के उद्देश्य से 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक सेवा संकल्प अभियान चलाया जा रहा है। इसके तहत विभिन्न विभागों के माध्यम से जनजागरूकता और जनभागीदारी से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के लिए सरकार के प्रयासों के साथ समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी जरूरी है। धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों को स्वच्छ रखना सभी की जिम्मेदारी है। लोगों को अपने घर के साथ-साथ सार्वजनिक स्थानों की साफ-सफाई पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने एकल उपयोग वाले प्लास्टिक और पॉलीथिन का इस्तेमाल नहीं करने तथा कचरा निर्धारित स्थान पर डालने की अपील की।
नो प्लास्टिक जोन बनाने सामूहिक पहल की जरूरत – कलेक्टर
कलेक्टर रणबीर शर्मा ने कहा कि जतमई माता मंदिर प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा महत्वपूर्ण धार्मिक स्थल है, जहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में मंदिर परिसर और आसपास के वन क्षेत्र को स्वच्छ एवं प्लास्टिक मुक्त रखना आवश्यक है।
उन्होंने कहा कि प्लास्टिक लंबे समय तक नष्ट नहीं होता और पर्यावरण के लिए गंभीर चुनौती बनता है। गुटखा पाउच, प्लास्टिक पैकेट और अन्य कचरा इधर-उधर फेंकने से परिसर की सुंदरता प्रभावित होती है और प्रकृति को नुकसान पहुंचता है। जतमई धाम को ‘नो प्लास्टिक जोन’ बनाने के लिए सामूहिक प्रयास जरूरी हैं। प्रत्येक नागरिक को कचरे का उचित निस्तारण करने और प्लास्टिक का उपयोग कम करने की जिम्मेदारी निभानी चाहिए।
वनमंडलाधिकारी मयंक पांडे ने भी नागरिकों से धार्मिक स्थलों और वन क्षेत्रों को स्वच्छ रखने तथा पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।
आस्था के साथ प्रकृति संरक्षण का संकल्प
कार्यक्रम के दौरान अतिथियों ने जतमई माता मंदिर में दर्शन कर जिले की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर जिला पंचायत सभापति शिवांगी चतुर्वेदी, जनपद पंचायत अध्यक्ष मीरा ठाकुर सहित अन्य जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में नागरिक मौजूद रहे।
‘सेवा मेरा योगदान’ के तहत आयोजित इस अभियान ने संदेश दिया कि धार्मिक आस्था के साथ प्राकृतिक धरोहरों की रक्षा भी जरूरी है। सामूहिक श्रमदान, पौधरोपण और प्लास्टिक मुक्त परिसर की पहल के जरिए जतमई धाम को स्वच्छ, हरित और पर्यावरण-अनुकूल बनाने की दिशा में जनभागीदारी पर जोर दिया गया।
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