नवापारा-राजिम। नगर पालिका परिषद गोबरा-नवापारा में करीब 5 लाख रुपये की लागत से लगा टीन शेड गायब होने का मामला सामने आया है। वार्ड क्रमांक-6 में आम नागरिकों की सुविधा के लिए लगाए गए टीन शेड के कथित रूप से बेच दिए जाने के आरोप है। मामले में वार्ड पार्षद की भूमिका संदिग्ध मानी जा रही है।
जानिए क्या है मामला
नगर पालिका परिषद गोबरा-नवापारा द्वारा नगर के वार्ड क्रमांक-6 में करीब 5 लाख रुपये की लागत से टीन शेड लगाया गया था, जो अब गायब हो गया है। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया है कि आम नागरिकों की सुविधा के लिए लगाए गए टीन शेड वार्ड के कांग्रेस पार्षद तरुण कंसारी द्वारा बेच दिया गया हैं, जबकि इस पूरे मामले में नगर पालिका प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों की ओर से अब तक कोई स्पष्ट जवाब सामने नहीं आया है।
पालिका प्रशासन की भूमिका पर भी उठे सवाल

मामले ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर एवं वार्डवासियों का कहना है कि यदि सार्वजनिक संपत्ति हटाई गई तो इसकी जानकारी मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) लवकेश पैकरा और संबंधित अधिकारियों को क्यों नहीं है? यदि जानकारी है तो कार्रवाई क्यों नहीं हुई? पूरे मामले में अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी नगर में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है।
आरटीआई में मांगी जानकारी, जवाब देने से किया इनकार
मामले की सच्चाई जानने के लिए वार्ड निवासी संजू कंसारी ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत टीन शेड की स्थापना, वर्तमान स्थिति तथा संबंधित अभिलेखों की जानकारी मांगी। आरोप है कि नगर पालिका के जन सूचना अधिकारी निखिल चंद्राकर ने स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराने के बजाय नियमों का हवाला देते हुए सूचना देने से इनकार कर दिया।
अब आवेदन वापस लेने का दबाव!

आरोप यह भी है कि मामला मीडिया में आने के बाद आरटीआई आवेदक पर आवेदन वापस लेने के लिए दबाव बनाया जा रहा है। यदि यह आरोप सही पाए जाते हैं तो यह सूचना के अधिकार कानून की भावना के विपरीत होने के साथ-साथ पारदर्शिता और जवाबदेही पर भी गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।
5 लाख की संपत्ति आखिर गई कहां?
नगरवासियों का सीधा सवाल है कि यदि टीन शेड हटाया गया तो किसके आदेश पर हटाया गया? क्या इसके लिए कोई प्रशासनिक अनुमति ली गई? हटाने के बाद सामग्री कहां जमा की गई या उसका क्या उपयोग हुआ? यदि शेड बेचा गया तो किसे बेचा गया और उससे प्राप्त राशि का हिसाब कहां दर्ज है? इन सभी सवालों के जवाब अब नगर पालिका प्रशासन और संबंधित जनप्रतिनिधियों से मांगे जा रहे हैं।
सीएमओ बोले – नोटिस जारी कर मांगा स्पष्टीकरण
इस संबंध में मुख्य नगर पालिका अधिकारी लवकेश पैकरा ने कहा कि मामला संज्ञान में आने के बाद संबंधित पक्ष को नोटिस जारी कर वस्तुस्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके लिए तीन दिन का समय दिया गया है। प्राप्त जवाब के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पार्षद से संपर्क नहीं हो सका
मामले में पक्ष जानने के लिए हमारे प्रतिनिधि ने वार्ड पार्षद तरुण कंसारी से दूरभाष पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
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