नवापारा-राजिम। नवापारा से लगे ग्राम कुर्रा की आदिवासी सेवा भूमि के कथित फर्जी हस्तांतरण और खरीद-बिक्री के मामले में कार्रवाई अब पुलिस स्तर तक पहुंच गई है। अभनपुर SDM की जांच में भूमि के हस्तांतरण को लेकर गंभीर कमियां और विसंगतियां सामने आने के बाद संबंधित दोषी व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की अनुशंसा की गई है।
इसके बाद तहसील कार्यालय की ओर से पुलिस को आवेदन भेजा गया, लेकिन अब गोबरा नवापारा पुलिस ने तहसील कार्यालय से स्पष्ट जांच प्रतिवेदन और अभिमत मांगा है कि आखिर एफआईआर किन व्यक्ति या व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज की जानी है।
क्या है पूरा मामला?
मामला ग्राम कुर्रा स्थित खसरा नंबर 641, वर्तमान खसरा नंबर 941, रकबा 0.53 हेक्टेयर भूमि से जुड़ा है। राजस्व जांच दस्तावेजों में इस भूमि को आदिवासी सेवा भूमि बताया गया है। शिकायतकर्ता एवं कुर्रा के पूर्व सरपंच गोवर्धन तारक ने आरोप लगाया कि उक्त भूमि का सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना नवापारा निवासी केशव सोनकर पिता कंगलू सोनकर के पक्ष में विक्रय एवं हस्तांतरित किया गया।
शिकायत में भूमि को गैर-आदिवासी के पक्ष में हस्तांतरित किए जाने तथा भूमि के दस्तावेजों एवं जाति संबंधी रिकॉर्ड में विसंगतियों का भी उल्लेख किया गया। इन्हीं बिंदुओं को लेकर मुख्यमंत्री, राजस्व मंत्री और कलेक्टर सहित अधिकारियों से शिकायत की गई थी।
शिकायत के बाद शुरू हुई राजस्व जांच
शिकायत मिलने के बाद मामले की जांच राजस्व विभाग के स्तर पर की गई। जांच में भूमि से जुड़े पुराने राजस्व अभिलेख, पंजीकृत दस्तावेज और संबंधित पक्षों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों का परीक्षण किया गया। पक्षकारों के बयानों और जाति संबंधी दस्तावेजों को भी जांच के दायरे में लिया गया। जांच में भूमि के हस्तांतरण को लेकर गंभीर कमियां और विसंगतियां सामने आने की बात एसडीएम कार्यालय के आदेश में दर्ज है। दस्तावेज के अनुसार विवादित भूमि के संबंध में 16 जून 2011 को उप पंजीयक कार्यालय अभनपुर में पंजीकृत दस्तावेज के माध्यम से बिक्री का उल्लेख है।
SDM ने दिए कार्रवाई के निर्देश
राजस्व जांच प्रतिवेदन का परीक्षण करने के बाद अभनपुर SDM ने 14 अगस्त 2026 को तहसीलदार को कार्रवाई के निर्देश दिए। आदेश में कहा गया कि जांच में आदिवासी सेवा भूमि को तथ्यों को छिपाकर तथा सक्षम प्राधिकारी की अनुमति के बिना गैर-आदिवासी के पक्ष में विक्रय किए जाने संबंधी गंभीर कमियां और विसंगतियां सामने आई हैं।
SDM ने संबंधित विक्रेताओं, क्रेता और अन्य दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों के खिलाफ छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता तथा प्रचलित कानूनी प्रावधानों के तहत संबंधित थाने में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। यानी प्रशासनिक जांच के स्तर पर मामला केवल शिकायत तक सीमित नहीं रहा, बल्कि जांच के बाद पुलिस कार्रवाई की अनुशंसा तक पहुंच गया।
तहसील से पुलिस को भेजा गया आवेदन
SDM के निर्देश के बाद तहसील कार्यालय की ओर से 18 सितंबर 2026 को गोबरा नवापारा थाना पुलिस को आवेदन भेजा गया। इस आवेदन के साथ भूमि से संबंधित जांच और दस्तावेज पुलिस को उपलब्ध कराए गए। इसके बाद पुलिस ने आवेदन और दस्तावेजों का परीक्षण किया। यहीं से मामले में एक नया सवाल सामने आया कि राजस्व जांच में जिन लोगों को दोषी माना गया है, उनके नाम और भूमिका स्पष्ट रूप से किस आधार पर निर्धारित की गई है।
पुलिस ने मांगा स्पष्ट अभिमत
इसके बाद 4 अक्टूबर 2026 को गोबरा नवापारा थाना प्रभारी ने नायब तहसीलदार को पत्र भेजा। पुलिस ने तहसील कार्यालय से स्पष्ट जांच प्रतिवेदन और संबंधित दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा। पुलिस के पत्र का मुख्य बिंदु यह है कि मामले में प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज करने के लिए यह स्पष्ट होना जरूरी है कि FIR किस व्यक्ति या किन व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज की जानी है।
इसलिए पुलिस ने आवेदन को खारिज करने के बजाय तहसील कार्यालय से स्पष्ट अभिमत मांगा है, ताकि राजस्व जांच के निष्कर्षों के आधार पर विधिसम्मत कार्रवाई की जा सके।
पुलिस अब यह जानना चाहती है कि राजस्व जांच के अनुसार भूमि के कथित हस्तांतरण में कौन-कौन लोग जिम्मेदार पाए गए हैं? विक्रेता और क्रेता की क्या भूमिका है? कथित कूटरचना या दस्तावेजी अनियमितता के लिए किन लोगों को जिम्मेदार माना गया है? किन व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की गई है? इन बिंदुओं पर स्पष्ट जवाब मिलने के बाद ही पुलिस आगे की कानूनी प्रक्रिया तय करेगी।
करोड़ों की जमीन होने से मामला महत्वपूर्ण
ग्राम कुर्रा की उक्त भूमि की वर्तमान कीमत करोड़ों रुपये बताई जा रही है। भूमि के नेशनल हाईवे से लगे होने के कारण भी इसका विवाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में पुराने राजस्व रिकॉर्ड, पंजीकृत दस्तावेज, भूमि की प्रकृति और कथित हस्तांतरण की वैधानिकता को लेकर उठे सवालों का जवाब जांच के जरिए सामने आना जरूरी है।
अब आगे क्या होगा?
फिलहाल मामले में SDM की जांच और एफआईआर की अनुशंसा हो चुकी है, तहसील कार्यालय पुलिस को आवेदन भी भेज चुका है, लेकिन पुलिस ने FIR दर्ज करने से पहले तहसील कार्यालय से स्पष्ट जांच प्रतिवेदन और अभिमत मांगा है, जिसके आधार पर पुलिस आगे की कार्रवाई करेगी।
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