काठमांडू। नेपाल-तिब्बत सीमा पर बुधवार को अचानक आई बाढ़ (Catastrophe in Nepal) ने हिमालयी क्षेत्र में ऐसी तबाही मचाई कि देखते ही देखते गांव, सड़कें, पुल और बिजली परियोजनाएं मलबे और सैलाब में समा गईं। ताजा रिपोर्टों के अनुसार नेपाल और तिब्बत क्षेत्र को मिलाकर 98 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि सैकड़ों लोग अब भी लापता हैं। नेपाल में करीब 95 मौतों की पुष्टि हुई है।
सुबह आया सैलाब, मिनटों में बदल गया पूरा इलाका
रसुवा जिले में भोटेकोशी नदी का पानी अचानक विकराल रूप में आया। शुरुआती जांच में हिमखंड या बर्फ-चट्टानों के बड़े हिस्से के टूटने और उसके बाद नदी में आए अचानक जलप्रवाह को तबाही की बड़ी वजह माना जा रहा है। वैज्ञानिकों के अनुसार हालात की जांच जारी है और हाल की भूकंपीय गतिविधि तथा हिमालयी परिस्थितियां भी जांच के दायरे में हैं।
कैलाश यात्रा मार्ग पर बड़ा संकट
Catastrophe in Nepal: प्रभावित इलाका कैलाश मानसरोवर यात्रा और हिमालयी पर्यटन मार्ग से जुड़ा है। रिपोर्टों के अनुसार बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री लापता हैं, जिनमें भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। नेपाल के पर्यटन अधिकारियों के अनुसार लापता लोगों की संख्या 400 के आसपास पहुंच गई है और उनमें बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की है।
भारतीय दूतावास ने कहा है कि वह नेपाल सरकार के साथ लगातार संपर्क में है और फंसे भारतीयों को सुरक्षित निकालने के लिए राहत एवं बचाव प्रयासों में समन्वय किया जा रहा है।
सड़कें टूटीं, हाइड्रो प्रोजेक्ट बह गए
Catastrophe in Nepal: बाढ़ की रफ्तार इतनी तेज थी कि सड़क संपर्क कई जगह टूट गया। पुल, पुलिस चौकियां, वाहन और नदी किनारे की संरचनाएं सैलाब में बह गईं या मलबे में दब गईं। कई जलविद्युत परियोजनाओं को भी भारी नुकसान की खबर है, जिससे राहत और बचाव कार्य और मुश्किल हो गया है।
सुरक्षाबलों के 85 जवान भी लापता, हेलीकॉप्टर और ड्रोन से तलाश
जानकारी के मुताबिक बाढ़ में सुरक्षाबलों के 85 जवानों से संपर्क टूट गया है। इनमें नेपाली सेना के 44, नेपाल पुलिस के 28 और आर्म्ड पुलिस फोर्स के 13 जवान शामिल बताए गए हैं। नेपाली सेना, पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल बड़े पैमाने पर खोज एवं बचाव अभियान चला रहे हैं।
दुर्गम पहाड़ी इलाकों और टूटी सड़कों के कारण बचाव दलों को भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। लापता लोगों की तलाश में हवाई और तकनीकी संसाधनों का उपयोग किया जा रहा है। नेपाल ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग की अपील भी की है।
Catastrophe in Nepal: कई हेलिकॉप्टरों को भी रेस्क्यू ऑपरेशन में लगाया गया है। दुर्गम पहाड़ी इलाके, टूटे पुल और बह चुकी सड़कें राहत दलों के सामने बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। नेपाल सरकार ने प्रभावित जिलों में जाने वाले पर्यटकों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है। लोगों को नदियों, नदी किनारों और पुलों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी गई है।
बैंक शाखाएं बहीं, कर्मचारी भी लापता
Catastrophe in Nepal: भोटेकोशी बाढ़ का असर नेपाल के बैंकिंग नेटवर्क पर भी पड़ा है। रसुवा क्षेत्र में कई वाणिज्यिक बैंक शाखाओं के प्रभावित होने की खबर है। नेपाल बैंकर्स एसोसिएशन के अनुसार, नौ बैंक शाखाएं बाढ़ की चपेट में आई हैं और करीब 26 बैंक कर्मचारियों से संपर्क नहीं हो पा रहा है। संचार लाइन और बिजली आपूर्ति बाधित होने से प्रभावित क्षेत्रों से सही जानकारी जुटाना भी मुश्किल हो रहा है।
भारत भी अलर्ट, नेपाल की तबाही का असर सीमापार चिंता का विषय
Catastrophe in Nepal: नेपाल में आई इस तबाही का असर भारत में भी दिखाई देने लगा है। भारत के उत्तर प्रदेश और बिहार के सीमावर्ती इलाकों में भी सतर्कता बढ़ा दी गई है। बिहार सरकार ने गंडक नदी में जलप्रवाह बढ़ने की आशंका के बीच पूरे तंत्र को हाई अलर्ट पर रखा है और वाल्मीकिनगर स्थित गंडक बैराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं। वहीं भारत ने नेपाल को हरसंभव मानवीय सहायता देने का भरोसा दिलाया है।
भारत ने भेजी 10 टन मानवीय सहायता
भारत ने नेपाल की मदद के लिए राहत अभियान शुरू कर दिया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर के अनुसार, भारत ने नेपाल के लिए 10 टन मानवीय सहायता, आपदा राहत सामग्री और जरूरी दवाइयां भेजी हैं।
भारतीय वायुसेना के मालवाहक विमानों को भी राहत सामग्री पहुंचाने के लिए तैयार किया गया है। सूत्रों के अनुसार, सी-130जे विमान को तत्काल रवाना करने की तैयारी है, जबकि सी-17 ग्लोबमास्टर के जरिए भी राहत सामग्री नेपाल भेजी जा सकती है।
प्रधानमंत्री मोदी ने किया संपर्क
Catastrophe in Nepal: नेपाल में आई भीषण आपदा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के नेतृत्व से संपर्क कर पीड़ितों के प्रति संवेदना व्यक्त की और हरसंभव मानवीय सहायता का भरोसा दिया। भारत ने कहा है कि संकट की इस घड़ी में वह नेपाल और वहां के लोगों के साथ खड़ा है।
राजनीतिक नेताओं ने जताई चिंता
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने भी नेपाल की आपदा पर चिंता जताई है। दोनों नेताओं ने लापता भारतीय नागरिकों का जल्द पता लगाने और उनके परिवारों को हरसंभव सहायता देने की मांग की है।
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