रायपुर। सक्ती जिले के डरभा स्थित वेदांता पावर लिमिटेड, सिंघितराई में 14 अप्रैल 2026 को हुएऔद्योगिक हादसे की जांच को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) छत्तीसगढ़ के प्रदेश अध्यक्ष टिकेंद्र सिंह ठाकुर ने जांच प्रक्रिया में हो रही देरी पर गंभीर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि शासन द्वारा निर्धारित 30 दिन की समय-सीमा बीतने के बावजूद जांच रिपोर्ट अब तक सार्वजनिक नहीं की गई है।
तीन बिन्दुओं पर दिए थे जांच के निर्देश
इंटक की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार, छत्तीसगढ़ शासन के सामान्य प्रशासन विभाग ने 17 अप्रैल 2026 को जारी आदेश के तहत बिलासपुर संभाग के आयुक्त को हादसे की जांच का जिम्मा सौंपा था। जांच के लिए तीन प्रमुख बिंदु तय किए गए थे, जिसमें दुर्घटना कैसे हुई, उसके कारण क्या थे और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या उपाय किए जाएं। शासन ने जांच अधिकारी को 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के स्पष्ट निर्देश भी दिए थे।
इंटक का दावा है कि सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में आयुक्त कार्यालय ने बताया कि जांच प्रक्रिया अभी भी प्रगति पर है और इस कारण जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जा सकती। प्रस्तुत दस्तावेज में भी यह उल्लेख है कि ‘‘जांच कार्यवाही प्रक्रियाधीन होने के कारण जानकारी दिया जाना संभव नहीं है।’’
इंटक ने उठाए कई अहम सवाल
इंटक प्रदेश अध्यक्ष टिकेंद्र सिंह ठाकुर ने कहा कि यदि निर्धारित समय-सीमा में जांच पूरी नहीं हुई तो शासन को सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना चाहिए कि क्या जांच अवधि बढ़ाने का कोई आधिकारिक आदेश जारी किया गया है। यदि ऐसा आदेश जारी हुआ है तो उसकी प्रमाणित प्रति सार्वजनिक की जाए। साथ ही यह भी बताया जाए कि जांच में देरी के वास्तविक कारण क्या हैं और क्या जांच अधिकारी ने समय-वृद्धि की अनुमति मांगी थी।
कहीं जांच को दबाने की कोशिश तो नहीं?
इंटक ने आशंका जताई है कि इतने गंभीर औद्योगिक हादसे की जांच रिपोर्ट महीनों बाद भी सामने नहीं आना कई सवाल खड़े करता है। संगठन का कहना है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि कहीं जांच को अनावश्यक रूप से लंबित रखकर पूरे मामले को दबाने या कंपनी प्रबंधन को राहत देने की कोशिश तो नहीं की जा रही है।
पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग
इंटक ने राज्य सरकार से मांग की है कि जांच रिपोर्ट शीघ्र पूरी कर सार्वजनिक की जाए, जांच में हुई देरी के कारण बताए जाएं तथा यदि किसी स्तर पर लापरवाही हुई है तो संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए। संगठन का कहना है कि यह मामला केवल प्रशासनिक प्रक्रिया का नहीं, बल्कि मृत एवं प्रभावित श्रमिकों के परिवारों को न्याय दिलाने और भविष्य में ऐसी दुर्घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने से जुड़ा गंभीर जनहित का विषय है।
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