टाइगर रिजर्व में दिखा दुर्लभ ‘ढोल’ का झुंड
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छत्तीसगढ़ के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व से वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में एक बड़ी खबर सामने आई है। अखिल भारतीय बाघ आकलन (AITE)-2026 के तहत लगाए गए कैमरा ट्रैप में पहली बार चार दुर्लभ भारतीय जंगली कुत्तों (ढोल) का संगठित झुंड रिकॉर्ड हुआ है। वन विभाग ने इसे जैव विविधता संरक्षण, बेहतर वन प्रबंधन और स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण संकेत बताया है।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप के मार्गदर्शन में पिछले कुछ वर्षों से उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में वन्यजीव संरक्षण, अवैध शिकार पर नियंत्रण और प्राकृतिक आवासों के संरक्षण के लिए लगातार प्रभावी कदम उठाए जा रहे हैं। इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम अब वन्यजीवों की बढ़ती मौजूदगी के रूप में सामने आने लगा है।

संकटग्रस्त प्रजाति की मौजूदगी बनी अच्छी खबर

भारतीय जंगली कुत्ता ढोल देश के सबसे दुर्लभ और संकटग्रस्त मांसाहारी वन्यजीवों में शामिल है। किसी भी वन क्षेत्र में इनकी मौजूदगी इस बात का संकेत मानी जाती है कि वहां शिकार प्रजातियों जैसे चीतल, सांभर और जंगली सूअर की पर्याप्त उपलब्धता है तथा जंगल का प्राकृतिक आवास सुरक्षित और संतुलित है।

विशेषज्ञों के अनुसार ढोल सामाजिक प्रवृत्ति वाले वन्यजीव हैं, जो झुंड में रहकर शिकार करते हैं और जंगल में शाकाहारी जीवों की संख्या को नियंत्रित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इससे पूरे पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बना रहता है।

संरक्षण के प्रयास ला रहे रंग

वन विभाग के अनुसार उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में संरक्षण को मजबूत करने के लिए कई महत्वपूर्ण पहल की गई हैं। रिजर्व क्षेत्र की लगभग 956 हेक्टेयर वन भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया, जिससे वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास और आवागमन के रास्ते फिर से बहाल हुए। इसके साथ ही 550 से अधिक वन्यजीव अपराधियों और अवैध शिकारियों के खिलाफ कार्रवाई कर शिकार पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया गया।

रिजर्व में एंटी-पोचिंग अभियान को मजबूत किया गया है। कैमरा ट्रैप, आधुनिक निगरानी प्रणाली और नियमित गश्त के जरिए वन्यजीवों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जा रही है। इन संरक्षण प्रयासों में स्थानीय ग्रामीणों की सक्रिय भागीदारी भी सुनिश्चित की गई है।

सुरक्षित हुआ जंगल

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के अधिकारियों का कहना है कि कैमरा ट्रैप में चार ढोलों का संगठित झुंड रिकॉर्ड होना इस बात का प्रमाण है कि रिजर्व की खाद्य श्रृंखला पहले की तुलना में अधिक मजबूत हुई है। जंगल में वन्यजीवों के लिए सुरक्षित वातावरण विकसित हुआ है, जिससे दुर्लभ प्रजातियां भी यहां स्थायी रूप से विचरण कर रही हैं। वन विभाग का मानना है कि यह उपलब्धि वैज्ञानिक वन प्रबंधन, सख्त सुरक्षा व्यवस्था और प्रभावी संरक्षण रणनीति का प्रत्यक्ष परिणाम है।

वन्यजीव संरक्षण का उभरता मॉडल

उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में दुर्लभ वन्यजीवों की लगातार बढ़ती मौजूदगी यह दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ जैव विविधता संरक्षण और वन्यजीव प्रबंधन के क्षेत्र में तेजी से नई उपलब्धियां हासिल कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी तरह संरक्षण के प्रयास जारी रहे तो यह टाइगर रिजर्व आने वाले वर्षों में मध्य भारत के सबसे समृद्ध और सुरक्षित वन्यजीव आवासों में अपनी मजबूत पहचान स्थापित करेगा।

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By Yuvraj Sahu

Yuvraj Sahu Founder & Editor – Khabar Vistar युवराज साहू (Yuvraj Sahu) खबर विस्तार (Khabar Vistar) के संस्थापक एवं संपादक हैं। वे छत्तीसगढ़ की स्थानीय, प्रशासनिक, अपराध, शिक्षा एवं जनहित से जुड़ी खबरों का निष्पक्ष और तथ्यपरक कवरेज करते हैं।

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