Shyam Agrawal
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महानदी बाढ़ Mahanadi Flood Nawapara (10)
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नवापारा-राजिम। महानदी की बाढ़ ने सैकड़ों परिवारों के घरों में तबाही मचाई, राशन से लेकर जरूरी दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सामान तक बर्बाद हो गए, लेकिन अब पानी उतरने के करीब 15 दिन बाद भी प्रभावित परिवार आर्थिक सहायता की राह देख रहे हैं। बाढ़ के दौरान पीड़ितों के बीच पहुंचकर मदद का भरोसा देने वाले जनप्रतिनिधियों और शासन-प्रशासन के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि घोषित सहायता राशि आखिर कब तक लोगों के खातों में पहुंचेगी?

25-26 सितंबर को आई भीषण बाढ़ के बाद राजस्व विभाग ने प्रभावितों से बैंक खातों की जानकारी तो जुटाई, लेकिन अब तक सहायता का इंतजार कर रहे परिवारों की परेशानी कम नहीं हुई है। सामने नवरात्र, दशहरा और दीपावली जैसे त्योहार हैं, ऐसे में राहत राशि में देरी ने पीड़ितों की चिंता और बढ़ा दी है।

घोषणा बड़ी, लेकिन पीड़ितों के खाते खाली!

बाढ़ के बाद प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता देने की बात कही गई थी। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की ओर से बाढ़ प्रभावितों को 10 हजार रुपये सहायता देने की घोषणा भी किया गया, जबकि स्थानीय स्तर पर 5 हजार रुपये की सहायता राशि की चर्चा है। ऐसे में पीड़ित परिवारों के बीच यह सवाल बना हुआ है कि उन्हें वास्तविक रूप से कितनी राशि मिलेगी और भुगतान कब किया जाएगा।

राजस्व विभाग की टीम प्रभावित परिवारों से संपर्क कर बैंक खातों की जानकारी ले चुकी है। इसके बावजूद राशि जारी होने की स्पष्ट समय-सीमा सामने नहीं आने से लोगों में बेचौनी है। सवाल यह है कि जब प्रभावितों की जानकारी जुटाई जा चुकी है, तो सहायता राशि जारी करने की प्रक्रिया में देरी क्यों हो रही है? शासन-प्रशासन को इस पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि पीड़ित परिवार अनिश्चितता में न रहें।

अब दोबारा जिंदगी पटरी पर लाने की चुनौती

महानदी बाढ़ Mahanadi Flood Nawapara (10)महानदी में आई बाढ़ ने नवापारा के सोमवारी बाजार, इंदिरा मार्केट, तिरंगा चौक, बगदेही पारा समेत कई इलाकों को प्रभावित किया था। घरों में पानी घुसने से राशन, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, वाहन और रोजमर्रा के जरूरी सामान को नुकसान पहुंचा। कई परिवारों के सामने घरों की सफाई, मरम्मत और घरेलू जरूरतों को पूरा करने की चुनौती खड़ी हो गई।

बाढ़ का पानी उतर गया, लेकिन नुकसान की भरपाई अपने आप नहीं हो सकती। प्रभावित परिवारों को घर फिर से व्यवस्थित करने और जरूरी सामान खरीदने के लिए पैसों की जरूरत है। ऐसे में आर्थिक सहायता में देरी उनके लिए दोहरी मार साबित हो रही है।

कुछ परिवारों को चेक मिले, बाकी अब भी इंतजार में

महानदी बाढ़ Mahanadi Flood Nawapara (10)बाढ़ के दौरान राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री टंकराम वर्मा ने कुछ प्रभावित परिवारों को तत्काल मदद के रूप में 5-5 हजार रुपये के चेक दिए थे। वहीं, सेवा संकल्प अभियान के दौरान अभनपुर विधायक इंद्रकुमार साहू की ओर से भी प्रभावित परिवारों को 5-5 हजार रुपये के चेक वितरित किए गए थे। लेकिन जिन परिवारों को अब तक सहायता नहीं मिली है, वे अपने खाते में राशि आने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। ऐसे में प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि कितने परिवारों को सहायता दी जा चुकी है, कितने परिवार शेष हैं और बाकी पीड़ितों को भुगतान कब तक किया जाएगा।

त्योहारों से पहले मदद नहीं मिली तो कैसे संभलेंगे गरीब परिवार?

नवरात्र, दशहरा और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहार सामने हैं। बाढ़ से पहले ही आर्थिक कठिनाइयों से जूझ रहे परिवारों के लिए खराब हो चुके राशन, घरेलू सामान और मकानों की मरम्मत का खर्च उठाना आसान नहीं है। पीड़ितों को उम्मीद थी कि सरकार की ओर से घोषित सहायता समय पर मिलेगी, जिससे वे कम से कम अपनी जरूरी जरूरतें पूरी कर सकेंगे।

अब सवाल यह है कि जब बाढ़ पीड़ितों को तत्काल राहत देने की बात कही गई थी, तो सहायता राशि समय पर उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं? क्या त्योहारों से पहले सभी पात्र प्रभावितों को सहायता मिल पाएगी?

टिकेंद्र ठाकुर ने उठाई तत्काल सहायता और उचित मुआवजे की मांग

राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस इंटक के प्रदेश अध्यक्ष टिकेंद्र सिंह ठाकुर ने बाढ़ प्रभावित परिवारों को मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुरूप तत्काल आर्थिक सहायता जारी करने की मांग की है। उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, राजस्व मंत्री टंकराम वर्मा और प्रशासनिक अधिकारियों से आग्रह किया है कि बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन कर पीड़ित परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाए।

इंटक के प्रदेश अध्यक्ष टिकेंद्र सिंह ठाकुरठाकुर ने कहा कि बाढ़ के पानी में राशन, जरूरी दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक सामान और अन्य घरेलू सामग्री खराब होने से हजारों परिवार प्रभावित हुए हैं। उन्होंने यह भी मांग की कि सहायता वितरण में कोई भी पीड़ित परिवार छूटना नहीं चाहिए और नुकसान का वास्तविक आकलन कर राहत पहुंचाई जानी चाहिए।

अब भरोसे से आगे बढ़कर कार्रवाई दिखाने की जरूरत

बाढ़ के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों में प्रशासनिक टीमों और जनप्रतिनिधियों की सक्रियता सामने आई थी। लेकिन आपदा के बाद प्रभावित परिवारों को दोबारा सामान्य जीवन में लौटने के लिए आर्थिक मदद भी उतनी ही जरूरी है।

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By Yuvraj Sahu

Yuvraj Sahu Editor – Khabar Vistar युवराज साहू (Yuvraj Sahu) खबर विस्तार (Khabar Vistar) के संपादक हैं। वे छत्तीसगढ़ की स्थानीय, प्रशासनिक, अपराध, शिक्षा एवं जनहित से जुड़ी खबरों का निष्पक्ष और तथ्यपरक कवरेज करते हैं।

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