दुर्ग। दंत चिकित्सा के क्षेत्र में वैज्ञानिक शोध, आधुनिक उपचार पद्धतियों और प्रमाण आधारित चिकित्सा को नई दिशा देने के उद्देश्य से मैत्री दंत चिकित्सा महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, अंजोरा (दुर्ग) में रिसर्च मेथडोलॉजी पर Continuing Dental Education (CDE) प्रोग्राम का आयोजन किया गया। सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक आयोजित इस ज्ञानवर्धक कार्यक्रम में पीजी एमडीएस प्रथम एवं द्वितीय वर्ष के विद्यार्थियों को शोध की वैज्ञानिक प्रक्रिया, एविडेंस बेस्ड डेंटिस्ट्री और विभिन्न शोध पद्धतियों की गहन जानकारी दी गई।
कार्यक्रम का आयोजन डिपार्टमेंट ऑफ ओरल पैथोलॉजी एवं माइक्रोबायोलॉजी की एचओडी डॉ. अंशुता साहू, डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक हेल्थ डेंटिस्ट्री के प्राध्यापक डॉ. बाला सुब्रमण्यम एवं डॉ. सोनम अग्रवाल के तत्वावधान में किया गया।
डॉ. राम तिवारी ने बताई रिसर्च की असली ताकत
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में श्री बालाजी इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंस, रायपुर के डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक हेल्थ डेंटिस्ट्री के प्रोफेसर डॉ. राम तिवारी उपस्थित रहे। उन्होंने विद्यार्थियों को रिसर्च मेथडोलॉजी के विभिन्न महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी देते हुए बताया कि आज के दौर में दंत चिकित्सा केवल उपचार तक सीमित नहीं है, बल्कि वैज्ञानिक शोध के माध्यम से लगातार नई ऊंचाइयों को छू रही है।
उन्होंने कहा कि दंत चिकित्सा में अनुसंधान के माध्यम से नई तकनीकों, आधुनिक सामग्रियों, दवाओं और उपचार पद्धतियों का विकास संभव हुआ है। यही शोध रोगियों को बेहतर, सुरक्षित और अधिक प्रभावी उपचार उपलब्ध कराने का आधार बनता है।
रिसर्च से बदल रही है डेंटिस्ट्री की दुनिया
कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को बताया गया कि दांतों की सड़न, मसूड़ों की बीमारियों, मौखिक कैंसर सहित विभिन्न दंत समस्याओं के बेहतर निदान और उपचार में अनुसंधान की महत्वपूर्ण भूमिका है। डिजिटल डेंटिस्ट्री, डेंटल इम्प्लांट्स, लेजर तकनीक, 3D प्रिंटिंग, बायोमटेरियल्स और न्यूनतम इनवेसिव उपचार जैसी आधुनिक उपलब्धियां वैज्ञानिक शोध का ही परिणाम हैं।
विशेष रूप से Evidence Based Dentistry (EBD) पर चर्चा करते हुए बताया गया कि आधुनिक दंत चिकित्सा में उपचार संबंधी निर्णय तीन महत्वपूर्ण आधारों पर लिए जाते हैं जिसमें सर्वश्रेष्ठ उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण, चिकित्सक की क्लिनिकल विशेषज्ञता तथा रोगी की जरूरतें और प्राथमिकताएं।
शोध करने की कला और विज्ञान है रिसर्च मेथडोलॉजी
सीडीई प्रोग्राम में विद्यार्थियों को रिसर्च मेथडोलॉजी की वैज्ञानिक प्रक्रिया से विस्तारपूर्वक अवगत कराया गया। इसमें शोध समस्या का चयन, उद्देश्य निर्धारण, परिकल्पना तैयार करना, उपयुक्त रिसर्च डिजाइन चुनना, डेटा संग्रह, विश्लेषण, परिणामों की व्याख्या और शोध नैतिकता जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रकाश डाला गया।
विद्यार्थियों को बताया गया कि एक अच्छे शोध के लिए केवल डेटा एकत्र करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी विश्वसनीयता, निष्पक्षता और वैज्ञानिक मानकों का पालन भी अत्यंत आवश्यक है।
Observational और Experimental Study का बताया अंतर
कार्यक्रम में अवलोकनात्मक अध्ययन (Observational Study) और प्रयोगात्मक अध्ययन (Experimental Study) के बीच महत्वपूर्ण अंतर को भी सरल उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया।
अवलोकनात्मक अध्ययन में शोधकर्ता किसी स्थिति में हस्तक्षेप किए बिना प्राकृतिक रूप से होने वाली घटनाओं का निरीक्षण कर आंकड़े एकत्र करता है। वहीं प्रयोगात्मक अध्ययन में शोधकर्ता सक्रिय हस्तक्षेप करता है और विभिन्न समूहों के परिणामों की तुलना कर कारण और प्रभाव के संबंध को अधिक मजबूती से समझता है।
रैंडमाइज्ड कंट्रोल्ड ट्रायल (RCT) जैसे विषयों ने विद्यार्थियों की शोध संबंधी समझ को और मजबूत किया।
दो चरण में चला ज्ञानवर्धक सत्र
सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक दो चरण में आयोजित कार्यक्रम के दौरान विशेषज्ञ व्याख्यान और शैक्षणिक सत्रों के माध्यम से पीजी विद्यार्थियों को आधुनिक शोध की बारीकियों से परिचित कराया गया। कार्यक्रम के अंत में आयोजित प्रश्नोत्तरी सत्र में विद्यार्थियों ने विशेषज्ञों से अपनी जिज्ञासाओं का समाधान भी प्राप्त किया।
महाविद्यालय प्रबंधन ने बढ़ाया विद्यार्थियों का उत्साह
इस अवसर पर मैत्री एजुकेशनल सोसायटी के महासचिव राजेश जैन, डीन डॉ. प्रदीप बाबू कोम्मी, डीन (अकादमिक) डॉ. संजीव सिंह, वाइस डीन डॉ. योगेश साहू, महाविद्यालय के प्राध्यापकगण डॉ. सौम्या शर्मा, डॉ. शिरीष गोयल, डॉ. तनुज चौधरी, डॉ. प्रतीक सुराना, डॉ प्रतीक गुप्ता, डॉ. गुलाब चंद, डॉ. मेहताब भाटिया, डॉ. प्रियब्रत जेना, डॉ. दीपक राजपूत, डॉ. सृष्टि हरिहानो, डॉ. श्रृति शर्मा, डॉ. इशिका, कॉलेज प्रबंधन से वी.के. त्रिपाठी, राजेश भट्टाचार्य एवं धीरज बंजारी सहित बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
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