फिंगेश्वर। नगर पंचायत फिंगेश्वर स्थित प्रसिद्ध फणिकेश्वरनाथ महादेव मंदिर प्रांगण में आयोजित शिवमहापुराण कथा के दौरान इन दिनों पूरा नगर भक्तिरस में सराबोर नजर आ रहा है। कथा के पंचम दिवस भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह का प्रसंग सुनाया गया, तो कथा स्थल पर भक्ति और उत्साह का ऐसा रंग चढ़ा कि पूरा मंदिर परिसर हर-हर महादेव और जय माता पार्वती के जयघोष से गूंज उठा। बड़ी संख्या में शिवभक्त एवं धर्मप्रेमी श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण कर पुण्य लाभ अर्जित किया।
कथा व्यास पंडित भूपेंद्र धर दीवान एवं परायणकर्ता पंडित राहुल दुबे द्वारा शिवमहापुराण की कथा के माध्यम से श्रद्धालुओं को भगवान शिव की महिमा और भक्ति का रसपान कराया जा रहा है। पंचम दिवस सती चरित्र के वर्णन के पश्चात भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह प्रसंग का भावपूर्ण वर्णन किया गया। जैसे ही कथा में शिव-पार्वती विवाह का प्रसंग आया, श्रद्धालुओं के बीच उत्साह देखते ही बनता था। पूरा वातावरण जयघोष और भक्ति गीतों से गूंजने लगा।
नन्हे शिव-पार्वती ने मोहा मन
शिव-पार्वती विवाह प्रसंग को जीवंत बनाने के लिए नन्हे बच्चों ने भगवान शिव और माता पार्वती का स्वरूप धारण किया। बच्चों का मनमोहक रूप श्रद्धालुओं के बीच आकर्षण का केंद्र रहा। भक्तों ने नन्हे शिव-पार्वती पर पुष्पवर्षा की और फूल-मालाएं पहनाकर उनका आशीर्वाद लिया। विवाह उत्सव के दौरान ढोल-मंजीरों और भक्ति गीतों की धुन पर श्रद्धालु झूमते और नृत्य करते नजर आए।
महिला एवं पुरुष श्रद्धालुओं ने भगवान शिव और माता पार्वती के विवाह की खुशी में जमकर उत्सव मनाया। मंदिर परिसर का माहौल इतना भक्तिमय हो गया कि ऐसा प्रतीत हो रहा था मानो कैलाश धाम में स्वयं भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह उत्सव आयोजित हो रहा हो।
शिव-शक्ति के मिलन का प्रतीक है विवाह
कथा व्यास पंडित भूपेंद्र धर दीवान ने शिव-पार्वती विवाह के आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह केवल दो स्वरूपों का मिलन नहीं, बल्कि शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है। शिव के बिना शक्ति और शक्ति के बिना शिव की कल्पना अधूरी है। शिव-शक्ति के मिलन से ही सृष्टि का संतुलन बना रहता है।
उन्होंने कहा कि शिवमहापुराण की कथा केवल धार्मिक आख्यान नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली आध्यात्मिक यात्रा है। कथा के माध्यम से भगवान शिव के आदर्शों और उनके जीवन दर्शन को आत्मसात करने की प्रेरणा मिलती है। शिवमहापुराण कथा के आयोजन से फिंगेश्वर में लगातार भक्तिमय एवं आध्यात्मिक वातावरण बना हुआ है। कथा श्रवण के लिए प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु फणिकेश्वरनाथ महादेव मंदिर प्रांगण पहुंच रहे हैं।
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