पर्यटन की नई राजधानी बन रहा जशपुर
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छत्तीसगढ़ का जशपुर जिला अब केवल अपनी प्राकृतिक संपदा और आदिवासी संस्कृति के लिए ही नहीं, बल्कि तेजी से विकसित हो रहे पर्यटन केंद्र के रूप में भी नई पहचान बना रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने और स्थानीय लोगों की आजीविका को सशक्त बनाने की दिशा में लगातार काम कर रही है।

इसी का परिणाम है कि प्राकृतिक सौंदर्य, धार्मिक आस्था, रोमांच और सांस्कृतिक विरासत से समृद्ध जशपुर आज प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर के पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनता जा रहा है। हरी-भरी पहाड़ियां, घने साल के जंगल, कल-कल बहते झरने, स्वच्छ नदी-नाले और शांत वातावरण जशपुर की पहचान हैं। महानगरों की भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर सुकून और प्रकृति की गोद में कुछ पल बिताने की चाह रखने वाले लोगों के लिए यह जिला किसी स्वर्ग से कम नहीं है। वर्षभर हजारों पर्यटक यहां पहुंचकर प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेते हैं।

रानीदाह जलप्रपात: बारिश में बिखरती है अद्भुत छटा

पर्यटन की नई राजधानी बन रहा जशपुर
जशपुर के जलप्रपात पर्यटकों को कर रहा आकर्षित

जशपुर मुख्यालय से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित रानीदाह जलप्रपात जिले के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में शामिल है। घने जंगलों और हरी-भरी पहाड़ियों के बीच स्थित यह जलप्रपात विशेष रूप से वर्षा ऋतु में अपनी पूरी भव्यता के साथ दिखाई देता है। यहां का शांत वातावरण और मनमोहक दृश्य पर्यटकों को घंटों तक प्रकृति के बीच ठहरने को मजबूर कर देते हैं।

कैलाश गुफा: जहां प्रकृति और अध्यात्म का होता है मिलन

पर्यटन की नई राजधानी बन रहा जशपुर
प्राकृतिक रूप से निर्मित कैलाश गुफा

बगीचा विकासखंड में स्थित कैलाश गुफा प्राकृतिक रूप से निर्मित एक अद्भुत गुफा है। यहां भगवान शिव का मंदिर और संत गहिरा गुरु का आश्रम स्थित है। घने जंगलों के बीच स्थित यह स्थल धार्मिक आस्था के साथ-साथ आध्यात्मिक शांति का भी महत्वपूर्ण केंद्र माना जाता है। सावन और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

राजपुरी जलप्रपात और मयाली नेचर कैम्प का बढ़ रहा आकर्षण

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मयाली नेचर कैम्प का आकर्षण

बगीचा विकासखंड का राजपुरी जलप्रपात अपनी प्राकृतिक सुंदरता और मनोरम वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। वहीं कुनकुरी विकासखंड स्थित मयाली नेचर कैम्प रोमांच पसंद पर्यटकों की पहली पसंद बन चुका है। यहां बोटिंग सहित कई प्राकृतिक गतिविधियों का आनंद लिया जा सकता है। परिवार और युवाओं के लिए यह स्थान विशेष आकर्षण का केंद्र है।

विश्व का सबसे बड़ा प्राकृतिक शिवलिंग है मधेश्वर पहाड़

जशपुर की सबसे अनोखी पहचान मधेश्वर पहाड़ है। कुनकुरी क्षेत्र में स्थित यह विशाल पर्वत प्राकृतिक रूप से शिवलिंग के आकार का है और इसे गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में विश्व के सबसे बड़े प्राकृतिक शिवलिंग के रूप में दर्ज किया गया है। यह स्थल धार्मिक आस्था और प्राकृतिक आश्चर्य का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। यहां वर्षभर श्रद्धालुओं और पर्यटकों का तांता लगा रहता है।

कोतेबिरा और खुडिया रानी गुफा बनें आकर्षण का केंद्र

पर्यटन की नई राजधानी बन रहा जशपुर
नेचर कैम्प का आकर्षण

फरसाबहार विकासखंड में ईब नदी के किनारे स्थित कोतेबिरा अपनी विशाल प्राकृतिक चट्टानों, शांत वातावरण और मनोहारी पहाड़ी श्रृंखलाओं के लिए प्रसिद्ध है। वहीं बगीचा विकासखंड की खुडिया रानी गुफा अपने ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व के कारण पर्यटकों को आकर्षित करती है। यहां प्रकृति और इतिहास का दुर्लभ संगम देखने को मिलता है।

ग्रामीण पर्यटन से बदल रही गांवों की तस्वीर

जशपुर में पर्यटन केवल प्राकृतिक स्थलों तक सीमित नहीं है। जिला प्रशासन ने ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए कई अभिनव पहल की हैं। जिले में पांच होमस्टे विकसित किए गए हैं, जहां पर्यटक ग्रामीण परिवेश, स्थानीय खान-पान और आदिवासी संस्कृति का प्रत्यक्ष अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। स्थानीय युवाओं और ग्रामीणों को होमस्टे संचालन, आतिथ्य प्रबंधन तथा पर्यटक सेवाओं का प्रशिक्षण भी दिया गया है, जिससे रोजगार और आय के नए अवसर सृजित हुए हैं।

पर्यटन की नई राजधानी बन रहा जशपुर
नेचर कैम्प का आकर्षण

केरे गांव को विशेष रूप से एक आदर्श ग्रामीण पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां पर्यटक स्थानीय संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली से रूबरू हो सकते हैं। इससे गांवों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने के साथ-साथ पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है।

बेहतर सड़क संपर्क से आसान हुआ सफर

जशपुर तक पहुंचना अब पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है। जिला सड़क मार्ग से रायगढ़, सरगुजा, बिलासपुर सहित प्रदेश के प्रमुख शहरों से जुड़ा हुआ है। निकटतम रेलवे स्टेशन झारखंड का रांची और ओडिशा का झारसुगुड़ा है। वहीं बिरसा मुंडा हवाई अड्डा (रांची) और झारसुगुड़ा हवाई अड्डे से लगभग तीन घंटे की सड़क यात्रा कर पर्यटक आसानी से जशपुर पहुंच सकते हैं।

छत्तीसगढ़ के पर्यटन की नई पहचान

प्राकृतिक सौंदर्य, आध्यात्मिक आस्था, रोमांच, आदिवासी संस्कृति और ग्रामीण जीवन की अनूठी झलक समेटे जशपुर आज छत्तीसगढ़ के पर्यटन मानचित्र पर तेजी से अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित कर रहा है। सरकार की पर्यटनोन्मुखी पहल और स्थानीय लोगों की सहभागिता ने इस जिले को एक ऐसे पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया है, जहां आने वाला हर पर्यटक प्रकृति की गोद में सुकून, रोमांच और अविस्मरणीय अनुभव लेकर लौटता है। आने वाले वर्षों में जशपुर न केवल छत्तीसगढ़, बल्कि देश के प्रमुख इको-टूरिज्म और ग्रामीण पर्यटन स्थलों में अपनी मजबूत पहचान बनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।

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By Yuvraj Sahu

Yuvraj Sahu Founder & Editor – Khabar Vistar युवराज साहू (Yuvraj Sahu) खबर विस्तार (Khabar Vistar) के संस्थापक एवं संपादक हैं। वे छत्तीसगढ़ की स्थानीय, प्रशासनिक, अपराध, शिक्षा एवं जनहित से जुड़ी खबरों का निष्पक्ष और तथ्यपरक कवरेज करते हैं।

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