सुकमा:- छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित सुकमा जिले से सुशासन की एक प्रेरणादायक तस्वीर सामने आई है। जहां आमतौर पर दुर्गम रास्तों के कारण सरकारी अधिकारी पहुंचने से कतराते हैं, वहीं जनपद पंचायत कोंटा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) गौतम गहिर ने प्रशासनिक टीम के साथ मोटरसाइकिल पर सवार होकर जंगलों और पथरीले रास्तों को पार करते हुए अंतिम छोर के गांवों तक पहुंचकर विकास कार्यों का निरीक्षण किया।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मंशा और कलेक्टर अमित कुमार के निर्देशों के अनुरूप प्रशासन की इस पहल ने यह संदेश दिया कि अब विकास योजनाएं सिर्फ फाइलों तक सीमित नहीं रहेंगी, बल्कि उनका लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाया जाएगा।
पीएम आवास, स्कूल और आंगनबाड़ी का किया औचक निरीक्षण
प्रशासनिक टीम ने ग्राम पंचायत डब्बाकोंटा में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बन रहे मकानों, पंचायत भवन, स्कूल, आंगनबाड़ी केंद्र और बालक आश्रम भवन का निरीक्षण किया। स्कूल और उप स्वास्थ्य केंद्र की व्यवस्थाओं का भी जायजा लेते हुए सीईओ ने अधिकारियों को गुणवत्ता और समय-सीमा का कड़ाई से पालन करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि दूरस्थ क्षेत्रों के बच्चों और ग्रामीणों को शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी सुविधाएं समय पर उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
ग्रामीणों से किया सीधा संवाद
दौरे के दौरान प्रशासनिक टीम पेंटापाड़, बुर्कलंका और बड़ेकेड़वाल (तुमलपाड़) भी पहुंची। यहां प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के हितग्राहियों से सीधे बातचीत कर उन्हें जल्द से जल्द अपने पक्के मकानों का निर्माण पूरा करने के लिए प्रेरित किया गया।
सीईओ गौतम गहिर ने कहा कि शासन की हर जनकल्याणकारी योजना का लाभ प्रत्येक पात्र हितग्राही तक पहुंचाना जिला प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। अधिकारियों को मौके पर ही तकनीकी सहयोग और आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए गए।
भेज्जी में भी विकास कार्यों की समीक्षा
प्रशासनिक टीम ने संवेदनशील क्षेत्र भेज्जी का भी दौरा कर पंचायत भवन और प्रधानमंत्री आवासों के निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा की। अधिकारियों ने सभी कार्यों को युद्धस्तर पर पूरा करने के निर्देश देते हुए साफ कहा कि विकास कार्यों में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
ग्रामीणों में बढ़ा भरोसा
अधिकारियों के इस जमीनी दौरे से ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है। सुकमा प्रशासन ने स्पष्ट संकेत दिया है कि अधिकारी अब कार्यालयों तक सीमित नहीं रहेंगे, बल्कि जरूरत पड़ने पर जंगलों और दुर्गम इलाकों में भी पहुंचकर विकास कार्यों की निगरानी करेंगे।
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